यादों के सहारे ज़िंदा हूँ

“यादों के सहारे ज़िंदा हूँ” एक ऐसी अधूरी मोहब्बत की कहानी है, जहाँ इंसान दूर है, पर उसकी यादें आज भी दिल के सबसे करीब हैं।

 अब तू साथ नहीं, पर तेरी यादें साथ हैं, खामोशियों में भी तेरी बातें साथ हैं… हाथों में अब तेरा हाथ नहीं, पर उन लम्हों की खुशबू अब भी मेरी सांसों के पास है…   

तेरे बिना ये शामें अधूरी सी लगती हैं, हर हंसी में भी थोड़ी सी कमी सी लगती है… तस्वीरों को देखूँ तो दिल मान जाता है, कि तू दूर सही, पर कहीं न कहीं यहीं आसपास है…

वो हंसी, वो बातें, सब कुछ याद आता है, तेरा हर एक लम्हा दिल को सताता है… कभी तस्वीरों से, कभी ख्यालों से मिल लेता हूँ तुझसे, वरना ये दिल हर रोज तुझे पुकारता रह जाता है…

अब आदत सी हो गई है तन्हाइयों के साथ जीने की, पर दिल को आज भी उम्मीद है तुझे फिर से पाने की… तू लौटे ना लौटे ये अलग बात है, पर तेरी यादों के सहारे ही मेरी दुनिया आज भी ज़िंदा है…

कभी सोचा ना था यूँ दूर हो जाएंगे हम, बातें अधूरी, ख्वाब अधूरे छोड़ जाएंगे हम… पर आज भी तेरी एक झलक उन तस्वीरों में मिल जाती है, और दिल को यही तसल्ली मिलती है — तू अभी भी मेरे पास है….

@worthwords__